गया है घुन सभी कुछ
दूर तक गहरे, बहुत गहरे ।
बहुत चिनका हुआ शीशा
किसी ने रँग दिया जैसे,
बहुत चमका दिया हो या कि
घिसकर पुराने पैसे,
हुईं नज़रें सभी धुँधली
हुए हैं कान सब बहरे ।
बिवाई भरे पाँवों से
घिसटता चल रहा हर क्षण,
रुलाई रोककर सँभला
हुआ ज्यों-ज्यों सभी का मन,
ज़बां गूँगी सभी की
और उस पर हैं कड़े पहरे ।