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गरे गरे तक संकट हो गए / महेश कटारे सुगम

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गरे गरे तक संकट हो गए ।
कछू आदमी खिलकट हो गए ।

बोझ बढ़ौ जिम्मेदारी कौ,
नेंचे दब कें सिलपट हो गए ।

परौ बखत कौ ग़ज़ब रपेटा,
दिल-दिमाग सें जापट हो गए ।

नई उमर में कुजनें का भऔ,
पतौ नईं परौ चटपट हो गए ।

डग-डग पै आफत के ठाँड़े,
बड्डे-बड्डे जमघट हो गए ।

मौड़ा भये कमावे वारे,
सो आँखन सें औलट हो गए ।

राजनीत की जेई खासियत,
सुगम सीख कें छाकट हो गए ।