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गली में किसी के दिया घर जला है / सूर्यपाल सिंह

गली में किसी के दिया घर जला है।
किसी का हिया चाक होता चला है।

किसी के यहाँ आज खुषियाँ मनी हैं,
कहीं एक उल्का गिरा है, जला है।

कहें लोग द्वेशी सदा आदमी था,
इसी से यहाँ द्वेश ही तो पला है।

न पालो यहाँ द्वेश की आग अब तो,
नहीं जौज़ औ' ताक का मामला है।

सँभालो यहाँ आदमी इस तरह तुुुम,
सरोवर सजा फूल गमका खिला है।