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गीत मैंने लिखे हैं तुम्हारे लिए / रंजन कुमार झा

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बीती यादों के अनगिन सहारे लिए
गीत मैंने लिखे हैं तुम्हारे लिए

वो तुम्हारी छुअन का जो अहसास था
मिल रही निज धरा से ही आकाश था
मांग हमने गगन से सितारे लिए

कोई तुमसे जुदा कर, न ले जाए छिन
दो तुम्हारे नयन तकते थे रात-दिन
उन नयन से मिलन के इशारे लिए

पर मेरी साधनाएं अधूरी-विकल
रह गयी, गैर के संग गए तुम निकल
आँख के बहते अश्रु के धारे लिए

अब हो उस पार तुम बीच में है नदी
बिन तुम्हारे लगे चार पल भी सदी
बह रही धार गुमसुम किनारे लिए