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गीत - 1 / उदय भान मिश्र

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अंबर में चंदा का प्यार बहा जा रहा।
तारों के गहनों में, नाच रही चांदनी।
झींगुर की रुनझुन में, पायलें बजा रही।
बोल रही डालों पर 'पी-पी’ पपीहरी,
बिरही उरों में आज पीड़ा जा रही।

डोल रहे धरती पर चलदल के पीते, पात,
भीनी सुगंध लिये मंद पवन आ रहा।
अंबर में...

अलसाई पुरवैया आज बही जा रही।
पिघली सी चांदी की धार बही जा रही।
धरती की छाती पर फूल झरे जा रहे-
पातों के आनन पर आंसु ढले जा रहे।

खोज रहा जुगनू है-मनमाना देवता-
भूला सा, मन का सितार बजा जा रहा।
अंबार में...

झूम रही उपवन में चंपा की डालियां।
खेतों में झूम रहीं-बाजरे की बालियां।
झांक रहे झुरमुट से-पंछी अलसाये से-
मार रहे डालों पर तीतर फुदकारियां।

खेल रहा मारुत भी-लतिका की गोद में-
लहरों में धुंधला सा चांद छिपा जा रहा।
अंबर में...