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गीत 6 / आठवाँ अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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हम उनके लेॅ सहज सुलभ छी
जे अजपा जपि भजै निरन्तर, हम उनका अन्दर छी।

हे अर्जुन जे हमरा में हरदम चित रोपि रखै छै
नित्य निरन्तर जे जोगी हमरोॅ स्मरण करै छै
प्रेमपूर्वक जे भजै निरन्तर, सब विधि हम उनकर छी
हम उनके लेॅ सहज सुलभ छी।

रूप-नाम-गुण अरु प्रभाव लीला के नित गावै छै
जे चिन्तन नित करै निरन्तर, से हमरा पावै छै
परम सिद्धि पावै जेॅ जन, हम उनकर दरस करै छी
हम उनके लेॅ सहज सुलभ छी।

जे हमरा पावै ऊ दुख से, जन्म-मरण से छूटै
छूटै जन्म मरण के बन्धन जीव परम सुख लूटै
हम छी कालातीत पुरुष-अज-व्यापक-ब्रह्म अमर छी
हम उनके लेॅ सहज सुलभ छी।