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गीत 6 / ग्यारहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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हे सम्पूर्ण विश्व के स्वामी।
कोटि भुजा धारी, अनन्त मुख-लोचन, अन्तरयामी।

नैं तोहर छोॅ आदि-मध्य, नै अंत देखि पावै छी
तों अगणित रूपोॅ से युक्त, हम देखी चकरावै छी
तोहें सीमा रहित-कृष्ण छेॅ, विगत और आगामी
हे सम्पूर्ण विश्व के स्वामी।

मुकुट युक्त तों, गदा युक्त तों, चक्र युक्त नारायण
तों सब दिश सुप्रकाशवान, तों तेजपुंज दिव्यायण
तों अग्नि, रवि ज्योत युक्त तों, दुर्लभ ज्ञान नमामी
हे सम्पूर्ण विश्व के स्वामी।

अप्रमेय स्वरूप कृष्ण हम सहजें देख रहल छी
तोहें जानै जोग छिकै, अक्षर हम जानि रहल छी
तों परब्रह्म, जगत के आश्रय, सदा सत्य पथगामी
हे सम्पूर्ण विश्व के स्वामी।

तों अनादि, धर्म के रक्षक, तोहें पुरुष-पुरातन
तों सच्चिदानन्द घन, निर्गुण, तोहें सत्य सनातन
तों अव्यय, तों सकल विशेषण, तों कारक, तों नामी
हे सम्पूर्ण विश्व के स्वामी।