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गुरू दरशन करी ले रे मन / रामधारी सिंह 'काव्यतीर्थ'

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गुरू दरशन करी ले रे मन
जीवन सफल करी ले रे मन

तोरोॅ साथ के छौ जग में
सत्यनाम रटी ले रे मन

संत संगति हरदम करी ले
द्वैत दूर करी ले रे मन

बहु-बेटा स्वारथ के यारी
हिय विचार करी ले रे मन

अंत समय कोई न संगी
नाम जपन करी ले रे मन

बिनु गुरु कोय भेद न पावे
कोटि यतन करी ले रे मन

वेद, पुरान, सन्त कहै छै
हंस नाम जपी ले रे मन।