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गोधूलि में / सरिता शर्मा / विलियम बटलर येट्स

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थके समय में थका हुआ दिल,
गलत और सही के जाल को तोड़ो;
दिल, फिर से हँसो धुन्धली साँझ में,
दिल, फिर से आह भरो, सुबह की ओस में ।

तुम्हारी मातृभूमि आयरलैण्ड हमेशा जवान है,
ओस हमेशा चमकती है और गोधूलि धूसर है;
हालाँकि आप निराश हो रहे हैं और प्यार घट रहा है,
मिथ्यावादी जीभ की आग में जलते हुए ।

दिल, यहाँ आओ, जहाँ पहाड़ियाँ ही पहाड़ियाँ हैं :
क्योंकि वहाँ गूढ़ भाईचारे के लिए
सूर्य और चन्द्रमा और कन्दरा और वन
और नदी और धारा अपनी इच्छा से चलते हैं;

और परमेश्वर अपने एकमात्र सींग को घुमाते हुए खड़ा है,
और समय और दुनिया हमेशा उड़ रहे हैं;
और प्रेम धूसर साँझ जितना दयालु नहीं है,
और उम्मीद सुबह की ओस जितनी प्रिय नहीं है ।

मूल अँग्रेज़ी से सरिता शर्मा द्वारा अनूदित

लीजिए अब पढ़िए यही कविता मूल अँग्रेज़ी में
         William Butler Yeats
          Into The Twilight

Out-Worn heart, in a time out-worn,
Come clear of the nets of wrong and right;
Laugh, heart, again in the grey twilight,
Sigh, heart, again in the dew of the morn.

Your mother Eire is aways young,
Dew ever shining and twilight grey;
Though hope fall from you and love decay,
Burning in fires of a slanderous tongue.

Come, heart, where hill is heaped upon hill:
For there the mystical brotherhood
Of sun and moon and hollow and wood
And river and stream work out their will;

And God stands winding His lonely horn,
And time and the world are ever in flight;
And love is less kind than the grey twilight,
And hope is less dear than the dew of the morn.