भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

गोरोॅ गोरोॅ गालोॅ पर लाज के ललाई जेना / अनिल शंकर झा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गोरोॅ गोरोॅ गालोॅ पर लाज के ललाई जेना
कमलोॅ के फूलोॅ पर लाली ठहराय छै।
अनचोके कुच भार उचकि उछाल मारै
झिलमिल रेशमी के साड़ी लहराय छै।
चानी रं देह मह सजलोॅ अलक राशि
कामना के लाली लाल लोचन लखाय छै।
रूप मदमाती मदहोश मनमोहिनी के
देखी योगिराज हतयोग भहराय छै॥