भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र / अनवर शऊर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तनहा
लौट कर न देखूँगा चल पड़ा अगर तनहा

सच है उम्र भर किस का कौन साथ देता है
ग़म भी हो गया रुख़्सत दिल को छोड़ कर तनहा

आदमी को गुम-राही ले गई सितारों तक
रह गए बयाबाँ में हज़रत-ए-ख़िज़्र तनहा

है तो वज्ह-ए-रुसवाई मेरी हम-रही लेकिन
रास्तों में ख़तरा है जाओगे किधर तनहा

ऐ 'शुऊर' इस घर में इस भरे पड़े घर में
तुझ सा ज़िंदा-दिल तनहा और इस क़दर तनहा