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घड़ी एक घोड़ीलो थोबजे रे सायब बनड़ा / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

घड़ी एक घोड़ीलो थोबजे रे सायब बनड़ा
दाऊजी से मिलवा दो रे हठीला बनड़ा
दाऊजी से मिलकर काई करो वो सायब बनड़ी
दो न पालकड़े पाँव
चालो घर आपणा