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घरों की अवधारणा / ईमान मर्सल

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मैंने सोने की दुकान में अपने कान की बालियां बेच दीं ताकि चांदी के बाज़ार से एक अंगूठी ख़रीद सकूं, और फिर मैंने उस अंगूठी को पुरानी स्याही और एक ख़ाली नोटबुक के बदले बेच दिया। यह सब उस घटना से पहले हुआ जब मैं उस ट्रेन की सीट पर अपने काग़ज़ात भूल आई जो मुझे घर पहुंचाने वाली थी। जब भी मैं किसी शहर में पहुंचती हूं, मुझे लगता है, मेरा घर किसी और ही शहर में है।

ओल्गा, जिसे मैंने ऊपर की कोई बात नहीं बताई थी, कहती है, 'कोई मकान उसी क्षण घर बन पाता है, जिस क्षण वह बिक रहा होता है। बग़ीचा कितना सुंदर है या कमरे कितने बड़े, खुले-खुले हैं, यह आपको तभी पता चलता है, जब आप उसे रियल एस्टेट एजेंट की निगाह से देखते हैं। आप अपने दुस्वप्नों को, ख़ास अपने लिए, उन्हीं छतों के नीचे रखते हैं, और जब आप छोड़कर जा रहे होते हैं, तब उन्हें एक या बहुत हुआ तो दो सूटकेस में भर ले जाते हैं।' अचानक ओल्गा ख़ामोश हो जाती है, फिर ऐसे मुस्कराती है, जैसे कोई महारानी अपनी प्रजा से मिलते समय, किचन में रखी कॉफ़ी मशीन और खिड़की के बीच डोलते हुए। खिड़की, जो फूलों के दृश्य पर खुलती है।

ओल्गा के पति ने रानी का यह दृश्य नहीं देखा है, शायद इसलिए वह अब भी यह सोचता है कि जब वह अंधा हो जाएगा, तब यह मकान उसका सबसे भरोसेमंद दोस्त होगा। इसके कोने-अँतरे उसके क़दमों को पहचानेंगे और इसकी सीढिय़ां बेहद उदारता से उसे अंधेरे में गिरने से बचा लेंगी।

मैं एक चाभी खोज रही हूं, जो हमेशा मेरे हैंडबैग की तलहटी में खो जाती है, ओल्गा और उसका पति मुझे देख नहीं पाते, जबकि असल में मैं घरों की अवधारणा से ही मुक्त होने का अभ्यास कर रही हूं।

ज़माने-भर की धूल अपनी उंगलियों पर चिपकाए हर बार जब तुम यहां लौटती हो, अपने साथ लाई हुई चीज़ों को तुम इसकी दराज़ों में जमा करती हो। फिर भी तुम नकार देती हो कि यह मकान कोलाहल का भविष्य है, जहां मरी हुई चीज़ें एक पल को उम्मीद के साथ सौदेबाज़ी करती जान पड़ती हैं। मकान ऐसी जगह हो, जिसकी ख़राब रोशनी पर तुम्हारा कभी ध्यान तक न जाए, जिसके दीवारों की दरारें इतनी चौड़ी हो जाएं कि एक दिन तुम उन दरारों को दरवाज़ा मान लो।

अंग्रेजी से अनुवाद : गीत चतुर्वेदी