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घर-7 / अरुण देव

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इन्द्रधनुष से एक-एक कर उतर आए सातों रंग

जब बन गया घर
मज़दूरों ने कहा चलते हैं अपने घर कि घर कभी हमारा नहीं रहता

राज-मिस्त्री की हाथ की लकीरों में बस जाता है पुराना घर
जब वह फिर शुरू करता है कोई नया घर ।