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घर से निकली धूपो रानी / प्रकाश मनु

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घर से निकली धूपो रानी,
झटपट उसने छतरी तानी।
हँसकर बोली, बीबो धानी,
बड़ी ठंड है धूपो रानी,
फिर क्यों तुमने छतरी तानी?
जब गरमी में लू चलती हैं,
तब करती हो आनाकानी,
कभी न तुमने छतरी तानी।
क्यों करती इतनी मनमानी,
धूपो रानी, धूपो रानी!

कुढकर बोली, धूपो रानी,
जा-जा, जा-जा बीबो धानी।
मैंने अपनी छतरी तानी,
नहीं उधार की, बीबो धानी!
मैं जाती हूँ अपने रस्ते,
खूब करूँगी जी मनमानी।

कहकर चल दी धूपो रानी,
देख रही थी बोबो धानी।