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घोड़ी बठी नऽ धणियेरजी आया / निमाड़ी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

घोड़ी बठी नऽ धणियेरजी आया,
रनुबाई करऽ सिंगार हों चंदा
कसी भरी लाऊं जमुना को पाणी,
घर म्हारो दूर घागर म्हारी भारी,
घाटी घढ़ी हाऊं हारी चंदा
कसी भरी लाऊँ जमुना को पाणी।