भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चंदामामा / शैलजा पाठक

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आओगे तो आज भी
क्या लाओगे कुछ
मुनिया
के भूखे पेट क लिए
एक बार नहीं सोचा कि
वो मुंह में जाने वाला
कौर
जो रोज उसकी माँ
तुम्हारी ओर देख कर
मुनियाँ के मुंह में डालती है
कितना खाली होता है
लगातार तुम्हारी ओर देखते
देखते मुनिया सो जाती है मीठी नींद
आओ आना है तो चंदा मामा
पर माँ के विश्वास को
कब तक झूठा ठहराओगे
कभी तो लेके आ जाओ चांदी का कटोरा
जो दूध भात से भरा हो...