भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चंदावती / भारतेन्दु मिश्र

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चंदावती
हो चंदावती।
धुकुर-धुकुर होय लाग जियरा हमार
ओ चंदावती।

जामुन औ आम सबै अबकी बौरान हैं
गाँव की बिटेवा सब हुइ गयी जवान हैं
कामे मा लागै ना जियरा हमार
हो चंदावती।

जब ते तुम रूठी हम रहि गयेन अकेले
हमरे जिउ के खातिर हैं बड़े झमेले
रोजु राह द्याखति है जियरा हमार
हो चंदावती।

अब तौ घर आय जाव दउआ बीमार हैं
मानौ बसि दुइ दिन के अब उइ मेहमान हैं
छिनु-छिनु पै भागै रे जियरा हमार,
हो चंदावती।