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चइत में बरूआ बिदा भेल / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

चइत[1] में बरूआ बिदा भेल, बैसाख पहुँचल[2] हे॥1॥
जइबो[3] में जइबो ओहि देस, जहाँ दादा अप्पन[4] हे।
उनखर[5] चरन पखारी के, हम पंडित होयब हे।
हम बराम्हन[6] होयब हे॥2॥
जइबो में जइबो ओहि देस, जहाँ नाना अप्पन नाना हे।
उनखर चरन पखारी के, हम पंडित होयब हे।
हम बराम्हन होयब हे॥3॥

शब्दार्थ
  1. चैत्र मास
  2. पहुँचा, आ गया
  3. जाऊँगा
  4. अपना, निजी
  5. उनका
  6. ब्राह्मण