भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

चक्र / गिरधर राठी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जितनी देर पी मैं ने शराब

कई जगह उगे सूर्य कई जगह डूब गए

उड़े वायुयान मिले दिल तारे टूट गए

पत्तियाँ लहराईं चट्टानें फिसलीं

लाशें हुईं दफ़्न


जितनी देर मैंने पी शराब