भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चन्द्रमा / बुद्धिनाथ मिश्र

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चौरा पर साँझ दीप बारि कें
पूजा सँ प्यार बनल चन्द्रमा
राति जेकर ठाँढि धेने ठाढि अछि
गाछ सिंगरहार बनल चन्द्रमा ।

काँच बाँस बान्हल आकाशदीप
बिहुँसल अछि फेर कोनो बात पर
मोती सन आखर सँ प्रेमपत्र
लिखि गेल अछि के पुरइन-पात पर

नीनक मातल चानन गाछ तर
एक समाचार बनल चन्द्रमा ।

अयना मे सतरंगी प्रेमगीत
झलकै अछि माछ जेना जाल मे
कालिन्दी मे नहाइत राधिका-
कृष्णक अभिसार बनल चन्द्रमा ।

कहलो ने मानै मन- मृग जखन
बंसी-स्वर पसरै अछि साँझ-भोर
एखनो धरि मोन परैए अहाँक
गहना छारल देहक पोर-पोर

दूभि-धान पान-फूल सँ भरल
सोना कें थार बनल चन्द्रमा।