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चलनी रै रईं सूपा रै रये / महेश कटारे सुगम

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चलनी रै रईं सूपा रै रये
उतई कछू कुड मूता रै रये

रै रये साँचे भले आदमी
ओई गाँव में झूठा रै रये

बनीं झुपड़ियाँ दुखयारन कीं
बंगलन में आसूदा रै रये

एक तरफ श्याबासी रै रई
एक तरफ खौं ठूंसा रै रये

सुनत सहत हैं उतई रहत ,जां
गारीं लातें घूँसा रै रये

गाँव-गाँव बस्ती-बस्ती में
बिना कूत के खूँटा रै रये

पढ़े लिखन पै धौंस जमावे
देखौ छाप अँगूठा रै रये

रै रये पथरा बन कें हीरा
ककरा बन कें मूँगा रै रये