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चाँद सलौना हिन्नें आव - लोरी / चन्द्रप्रकाश जगप्रिय

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चाँद सलौना हिन्नें आव,
नूनू लेॅ दू झुम्मर गाव।
तब ताँय सुततै नै नी-केन्हौं।
लाल पलंग तोंय लेले आव,
खुआ-रबरी पावे पाव।
दूध-मलाई अलगे लान,
नूनू के ओकरे पर ध्यान।
जल्दी आव नै देर लगाव,
चाँद सलोना हिन्नें आव।
छम-दम करलै परियो आवै,
ओंहू दू ठो गीत सुनाबै,
सुग्गा-मैना नाचै खूब,
बगरो में भी ओत्तै हूब।
रथ पर ऐलै नींदिया रानी,
गढ़ले गढ़ले एक कहानी।
सुतलै नूनू अबकी दाव,
चाँद सलोना हिन्नें आव।