भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

चानी हेनो चकमक पोखरी के साफ जल / अनिल शंकर झा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चानी हेनो चकमक पोखरी के साफ जल
झुकी झुकी मुँह देखै आमी गाछी भोर सें।
एक दिशा कदमोॅ के जुगल बिरिछ रहै
जोगै लेली थाथी जेनां छली बली चोर सें।
एक दिशा ठाकुरोॅ के घोॅर निर्मल रहै
ठाकुर नहाबै नित दुखिया के लोर सें।
ताही पोखरी में आबी रूपसी स्नान करै
रूप के मिलान हुवेॅ पारेॅ नहीं और सें॥