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चित्रकार दोस्तों के नाम / कुमार विकल

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तुम मुझे रंगों की दुनिया में ले चलो

मैं तुम्हें शब्दों के मेले में ले चलता हूँ

शब्द केवल शब्द नहीं होते

उनके पीछे बहुत से लोग होते हैं

रंग—बिरंगे कपड़ों वाले लोग

लेकिन उनके कपड़ों का सबसे मुखर रंग

मिट्टी का रंग होता है,

मिट्टी जिससे सारे रंग जन्म लेते हैं.

तुम मुझे अपने रंगों की दुनिया में ले चलो

जहाँ मेरी माँ की रामायण पढ़ती आवाज़ ले जाती है

क्या तुम मुझे मेरी माँ की आवाज़ का रंग बता सकते हो?

जबकि मैं तुम्हारे रंग को एक आवाज़ दे सकता हूँ

आवाज़—

जो मिट्टी की गंध से आती है

और मेरी कविताओं में

तुम्हारे कैनवस पर बिखरे रंगों की तरह फैल जाती है

तुम मेरे शब्दों को रंग दो

मैं तुम्हारे रंगों को शब्द दूँगा.