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चुनाव गीत / कांतिमोहन 'सोज़'

हण्टरवाली फिर से आई
आई हण्टरवाली !

शुतुरमुर्ग़ ने
चतुर मुर्ग़ ने
स्वर्ण खेत की
गर्म रेत में
अपनी आँख छुपा ली !
हण्टरवाली फिर से आई
आई हण्टरवाली !

कमल खिलेंगे
खिलके रहेंगे
नेकरधारी साथ रहेंगे
महादेश की
मत-विशेष की
करनी है रखवाली !
हण्टरवाली फिर से आई
आई हण्टरवाई !

पर जो जन है
परम अकिसंचन
अतिनिर्धन है
घूम रहा है ढूँढ़ रहा है
लेकर वोट-कुदाली
हण्टरवाली फिर से आई
आई हण्टरवाली !