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चुप भी / चंद्र रेखा ढडवाल


बहुत बार
कहीं नहीं होता
न विश्वास में
न आस में
उसके होंठों से
झरता हुआ
एक भी शब्द
बोलते हुए अक्सर
चुप भी होती है औरत