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चूहा / श्रीनाथ सिंह

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बैठे बैठे दिन भर बिल में।
क्या सोचा करते हो दिल में?
चूहे जी बाहर तो आओ।
कोई अपनी कथा सुनाओ।
कुतर नई गुड़ियों की धोती।
किस लड़की को छोड़ा रोती?
किस लड़के की पुस्तक सुंदर,
काट छिपे हो बिल के अन्दर?
किसके तुमने चने चबाये?
किसके तुमने चावल खाये?
किसका तुमने घी पी डाला?
चुरा ले गये किसकी माला?
कितने जूठे बरतन चाटे?
किये कहाँ तक सैर सपाटे?
कितनी चतुर बिल्लियों से बच।
आये हो बतलाना सच सच?
दांत बने हैं तेज तुम्हारे।
ये चोखे हथियार तुम्हारे।
इनके ही बल हो मनमाना।
तुम खोदा करते बिल नाना
पर दुम है कुछ काम न देती।
उल्टा जान तुम्हारी लेती।
पकड़ उसे यदि कौवे पाते
तुम्हे उठा ले जाते खाते।
करके किसकी नक़ल निराली?
तुमने ऐसी दुम लगवाली ?
कुछ तो चूं! चूं ! बोलो प्यारे!
छिपे हुये हो क्यों मन मरे?