भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चेतावणी / मीठेश निर्मोही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बीसवै सईकै रै सेड़ै
कठै पूगग्या हां म्हे ?

नानी-दादी नै झुरै
दिन-रात
कांई गीत
अर
कांई बात!

तरसै गीतां नै कंठ
रांचै पाठकां नै
कविता अर सबद।

वेलै माईतां सारू
टाबर
अर बेटा सारू
तात।

संभाळौ, सभाळौ,
अर सभाळौ
नींतर व्हैला
आपघात।