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चोरी माखन की दै छोड़ि कन्हैया / ब्रजभाषा

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

चोरी माखन की दै छोड़ि
कन्हैया मैं समझाऊँ तोय

एक लख धेनु नंद बाबा कें
नित घर माखन होय
दधि माखन तू रोज चुरावै
हँसी हमारी होय
चोरी माखन की दै छोड़ि
कन्हैया मैं समझाऊँ तोय...