भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

छंद गीतक / शम्भुदान चारण

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा
(छंद गीतक)

तत मोय दाखे , सच्च भाखे , देख लागे दे तो
घट बीच राखे , देह सागे , भाव राखे भावतो
उर जाण वाके , ध्यान दाखे , मौन राखे मानवा
तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा ||

आकाश वायु तेज उदकर , और अचला आखवे
पच्चीस परगत , माँय हरकत , मान डर मत भूलते
एक तत मोह पांच पाई प्रगत भाई साधवा
तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा ||

आकाश आशा शीश वासा , देख दासा होय के
पल दस पासा , तीस श्वांसा , पलट पासा पोंच के
शोक काम क्रोधा , मोह बोधा , और भय उर भासवा
तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा ||

बसे वास नाभि , वाय विस पल , सांठा श्वांसा साजते
प्ररसार धावन वलन , चल कल , सूक जाणा साजते
ईम तत आंसू पांच भाखूं प्रगत वाकूं वायवा
तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा ||

तत तेज तीका , वास पीता , सांठ श्वांस वे
दस वीख वीसा , पाल दीसा , पांच परगत पास वे
नीन्द त्रसना कान्ति , आलसाना और खुदिया आखवा
तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा ||

उद तत आया भाल भाया , संत वीसी श्वांस वे
दस वीख तीसा , पाल दीसा , पांच परगत पास वे
एफ श्वेत सूत्र मूत्र मांही और रगतों आखा
तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा ||

तत धरण यां में , कालजा में , श्वांस या में डेढ़ सौ
पल पचा पा में , पलट वा में , प्रगत या में पेख जो
रोम त्वचा नाडी हाड यामे , मांस वागतो मेलवा
तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा ||

तत पोंच की तन माँय ताकत , शोध शाधक संग है
तुच्छ बुध्ध तायो भेद पायो , शोध कीनो जंग है
कवि कथियो शब्द मथियो करके जाणवा
तत ज्ञान ताकत तोल हाकल बोल निर्भय बंदवा ||