भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

छप्पर ऊपर कागा बोलै / अंगिका लोकगीत

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

दादी अपनी पोती के लिए जोग का मोल-भाव करना नहीं जानती और उसका यह भी विश्वास है कि मेरी अबोध बेटी अभी तक कुछ नहीं जानती। इस गीत में शुभ-सूचक काग की बोली का भी उल्लेख हुआ है। काग की बोली से प्रिय के आगमन की सूचना मिलती है। ‘बिलौकी’ में प्रायः स्त्रियाँ गाली और झूमर गाया करती हैं।

छप्पर ऊपर कागा बोलै।
कागा बोलै अमोल[1] हे॥1॥
दादा महल में जोग बिकै छै[2]
दादी मोल[3] नै[4] जानै हे॥2॥
हमरी कवन बेटी कुछुओ[5] नी[6] जानै।
राजा घरो[7] के रानी हे॥3॥

शब्दार्थ
  1. अनमोल
  2. बिकता है
  3. मोल-भाव करना
  4. नहीं
  5. कुछ भी
  6. नहीं
  7. घर की