आलमारी में
गरम कपड़ों के बक्से में
गद्दे के नीचे
किताबों के बीच मोरपंखी
की तरह
कहाँ छुपाऊँ तुम्हारी तस्वीर
कहा
कि देख न सके दूसरा कोई
क्या कहीं नहीं है
जगह कोई
मन के अलावा
छिपाने को तुम्हारी तस्वीर
विपुल विराट यह दुनिया
कितनी असुरक्षित जगह है
प्रेम के लिए
वही प्रेम जिससे
बसती है
दुनिया।