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जनकपुर की छवि का वर्णन / शिवपूजन सहाय

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अथ जनकपुर में की शोभासमाज वर्णन शैली

1.

पीतपट काछे आछे तूण कटि बाँधे काँधे चाप शर पाणि लोक लोचन सुखदाई हैं।
चन्दन कपूर भरपूर तनमाँह खौर श्यामचितचौर गौर जोरी मनभाई है।
कन्ध मृगराजसाज परमविशाल भुज नागमणिहार उर सुभग सुहाई है।
नवकंजलोचनभवमोचन पुनीत चारु कर्ण सर्वांग कामकोटि छवि छाई है॥

2.

कानन कनक फूल कल लोल अनमोल पेखि मन मुग्ध चख थकि थकि जाई है।
शारदेन्दु आनन विलोकि त्रायतापगत भौंहु धनु कुटिल अपार छवि पाई हैं।
बाँकी चितौन चारु तीछे कटाक्ष रेख तिलक अनूप सुखरूप दरशाई है।
केश अलिपुंज शिर चौतनी सुभग चारु नखशिख रुचिर सुदेश दुहुँ भाई है॥

3.

शोभासुखसीव जलजात गात नील मृदु कोटि 2 काम प्रति रोम 2 वारिये।
काकपक्ष सोहै सिर नीको लखि फीको काम बीच 2 गुच्छा कुसुमावली निहारिये।
परमसुचारु कान भूषण विराजमान कललोल कुण्डल कपोल सुखकारि ये।
चन्द्रमुखलोचन चकोर मुखकंजछवि मधुमकरन्दसों मलिन्द चख धारिये॥

4.

चन्दन कपूर चूर केसर तिलक भाल, विन्दु श्रम स्वेद कण मोती दल गायो है।
कुंतल घुँघुँवारे सुभग सँवारे शीश अलिपुंज देखि मदछड़ि के लजायो है।
भौंह धनु विकट अति निपट तिरीछे दृग नवल सरोज रतनारे मनभायो है।
सुभग किशोर वय नवल युवा के रूप परम अनूप सुकुमार भूप जायो है॥

5.

सुखमासदनवारे मदनमदकदनहारे दाडिमरदनवारे सुन्दर सँवारे हैं।
सघन बदनवारे दामिनिदमकवारे हाँस को विलास मन्द 2 शशि तारे हैं।
कम्बु कलग्रींव छविसींव उरमालमणि बाहु कर कलभ बलसिंधु के करारे हैं।
शांति शीलवारे कटि केहरि पटोरे पीत हंसवंशभूषण प्यारे दशरथदुलारे हैं॥

इतिश्री जनकपुर की छवि वर्णन समाप्ति