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जननीकेँ विश्वदर्शन / कृष्णावतरण / सुरेन्द्र झा ‘सुमन’

माय यशोदा कोर राखि सुत पिअबथि दूध स्व वक्ष
मूह बाबि किछु दृश्य देखाओल अद्भुत मातृ समक्ष
सूर्य-चन्द्र ग्रह-नखत घनाघन दृश्य समग्र खगोल
पुनि गिरि-वन नद-नदी ग्राम-पुर जनसंकुल भूगोल
जननी चकित कि सुत भय आयल छथि गोविन्द समक्ष
बदन गुफामे विश्व रूप दर्शन देलनि प्रत्यक्ष
लगले अरुण अधर संपुट कालनि मुख दृश्य अदृश्य
समटि लेल मायामय माया मायक हित उद्दिश्य
की छल स्वप्न, जागलहु देखल अथवा जादू जाल
कहइत रहली महरि यशोदा बुझल कठिन छल हाल
पुनि छनमे रोदन करइत शिशु लीला ललित पसारि
देलि बिसारि, सिनेह भरलि दुलराबथि ग्वालरि नारि