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जन कूँ तारि तारि तारि तारि बाप रमइया / रैदास

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।। राग धनाश्री।।
  
जन कूँ तारि तारि तारि तारि बाप रमइया।
कठन फंध पर्यौ पंच जमइया।। टेक।।
तुम बिन देव सकल मुनि ढूँढ़े, कहूँ न पायौ जम पासि छुड़इया।।१।।
हमसे दीन, दयाल न तुमसे, चरन सरन रैदास चमइया।।२।।