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जब चाँद गिर पड़ेगा / असंगघोष

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चाँद जब कभी गिर पडे़गा
आसमान से धरती पर
हम निहारना बन्द कर देंगे
धरती के चाँद को
बूढ़ी नानी का रचखा थम जाएगा
रुँध जाएगा लोरी गाती माँ का गला
नहीं रहेगा
बच्चों का चन्दामामा
यह सृष्टि भी नहीं रहेगी
चलो,
ऐसे ही सही
जातियों की झंझटों से
पिण्ड तो छूट जाएगा।