जब तक एक विवाद रहा मैं
तब तक ही आबाद रहा मैं
महलों के लफ़्फ़ाज कंगूरे
गूँगी सी बुनियाद रहा मैं
काल पात्र में जिक्र नहीं था
लेकिन सबको याद रहा मैं
उनकी सब परिभाषाओं में
एक प्रखर अपवाद रहा मैं
शब्दों के उस कोलाहल में
अनबोला संवाद रहा मैं