भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

जमहूरियत / इक़बाल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


जमहूरियत

इस राज़<ref>रहस्य </ref>को इक मर्दे-फ़िरंगी<ref>यूरोपीय व्यक्ति</ref> ने किया फ़ाश<ref>प्रकट</ref>
हरचंद कि दाना<ref>समझदार</ref>इसे खोला नही‍ करते

जमहूरियत<ref>लोकतंत्र</ref>इक तर्ज़े-हुकूमत<ref>शासन पद्धति</ref>है कि जिसमें
बन्दों को गिना करते है‍ तोला नहीं करते

शब्दार्थ
<references/>