भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जय जय श्री बालमुकुंदा / सूरदास

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जय जय श्री बालमुकुंदा । मैं हूं चरण चरण रजबंदा ॥ध्रु०॥
देवकीके घर जन्म लियो जद । छुट परे सब बंदा ॥ च०॥१॥
मथुरा त्यजे हरि गोकुल आये । नाम धरे जदुनंदा ॥ च०॥२॥
जमुनातीरपर कूद परोहै । फनपर नृत्यकरंदा ॥ च०॥३॥
सूरदास प्रभु तुमारे दरशनकु । तुमही आनंदकंदा ॥ च०॥४॥