भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जश्न नहीं मनाओगे मेरे साथ / ल्युसिल क्लिफ़टन / सुजाता

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जश्न नहीं मनाओगे उसका
जो मैं बन गई हूँ
जीवन ही एक तरह का ?
कोई आदर्श नहीं था मेरे पास ।
 
बेबीलोन में जन्मी
स्त्री, वह भी अश्वेत
क्या देख सकती थी अपने सिवा,
कुछ भी होने के लिए ?

और मैंने किया
यहाँ तारों की रोशनी और मिट्टी के बीच
बने इस पुल पर
मेरा एक हाथ थामे रहा ज़ोर से
मेरे ही दूसरे हाथ को;

आओ, जश्न मनाओ
मेरे साथ कि हर दिन
की गई कोशिश मुझे मारने की
और असफल हुई ।

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुजाता