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जहाजण / रूपसिंह राजपुरी

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म्हारी धर्मपत्नी नै हवाई जहाज मैं,
चढणै गो मिल्यो पैली बारी चांस।
बण सुण राख्यो हो, कि ऊपरूं देख्यां,
कीड़ीयां बरगा दीसै, नीचला मानस।
चढतां ही बोली, देखो रै देखो,
कीड़ीयां बरगा दीसैं
बापड़ा नीचला लोग-लुगाई।
एयर होस्टेस हंस'र बोली,
अै वास्तव मैं ईं कीड़ीयां हैं,
अजे जहाज,
उड्डयो कोनी ताई।