जमाने में कोई अपना नहीं है।
मगर फिर भी कोई शिकवा नहीं है॥
जताते हैं सभी अपनत्व लेकिन
कोई भी साथ में रहता नहीं है॥
कोई आ कर हमारा हाथ थामे
फ़क़त है आरजू सपना नहीं है॥
उठा है दर्द दिल में बेबसी का
पुकारूँ पर कोई सुनता नहीं है॥
चले आओ बड़े बेचैन हैं हम
ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं है॥