भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ज़िंदगी इस तरह बिताना है / सिया सचदेव

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ज़िंदगी इस तरह बिताना है
अश्क पीना हैं मुस्कुराना हैं

आज फिर उसके पास जाना है
एक रूठे को फिर मानना है

हो के औरों के दरद-ओ-ग़म में शरीक
सब का ग़म अपना ग़म बनाना है

सिर्फ अपने गले लगे तो क्या
गैर को भी गले लगाना है

दर्द में कोइ मेरे साथ नहीं
साथ खुशियों में यह ज़माना है

जिस्म पर सर रहे, रहे न रहे
झूठ को जड़ से ही मिटाना हैं

क्यों सिया ज़ख्म चाहती हो नया
अपनी हिम्मत को आज़माना है?