ज़िन्दगी क़ैद से भी बद-तर है
कब मिलेगी निजात क्या कहिये
हर कदम हादिसा है, महशर है
ज़िन्दगी क़ैद से भी बद-तर है
जाने-कितने युगों का चक्कर है
वारदातें-हयात क्या कहिये
ज़िन्दगी क़ैद से भी बद-तर है
कब मिलेगी निजात क्या कहिये।
ज़िन्दगी क़ैद से भी बद-तर है
कब मिलेगी निजात क्या कहिये
हर कदम हादिसा है, महशर है
ज़िन्दगी क़ैद से भी बद-तर है
जाने-कितने युगों का चक्कर है
वारदातें-हयात क्या कहिये
ज़िन्दगी क़ैद से भी बद-तर है
कब मिलेगी निजात क्या कहिये।