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जा दिन तैं छवि सौं मुसुकात / मतिराम

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जा दिन तैं छवि सौं मुसुकात, कँ निरखे नंदलाल बिलासी।
ता दिन तैं मन-ही-मन मैं, 'मतिराम पियै मुसकानि सुधा सी॥

नेकु निमेष न लागत नैन, चकै चितवै तिय देव-तिया सी।
चंदमुखी न चलै न हिलै, निरबात निवास मैं दीपसिखा सी॥