भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जिद्दी मक्खी / दिविक रमेश

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कितनी जिद्दी हो तुम मक्खी
अभी उड़ाती फिर आ जाती!
हां मैं भी जिद्दी लेकिन
मां मनाती झट मन जाती।

मां तेरी समझाती होगी
जैसे मां मेरी समझाती।
जो बच्चे होते हैं जिद्दी
उनको अक्ल कभी ना आती।

अगर स्कूल तुम जाती होती
तुम भी समझदार बन जाती।
अच्छी-अच्छी बातें कितनी
टीचर जी तुमको समझाती!