भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जिस दिन से आए / रमेश रंजक

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

      जिस दिन से आए
       उस दिन से
       घर में यहीं पड़े हैं
       दुख कितने लंगड़े हैं ?

पैसे,
ऐसे अलमारे से
फूल चुरा ले जायें बच्चे
जैसे फुलवारी से

       दंड नहीं दे पाता
       यद्यपि-
      रँगे हाथ पकड़े हैं ।

नाम नहीं लेते जाने का
घर की लिपी-पुती बैठक से
काम ले रहे तहख़ाने का
धक्के मार निकालूँ कैसे ?

       ये मुझसे तगड़े हैं ।