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जीवन केवल गीत नहीं / राधेश्याम बन्धु

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जीवन केवल
गीत नहीं है, गीता की है प्रत्याशा,

पग-पग जहाँ
महाभारत है, लिखो पसीने की भाषा ।

हर आँसू को जंग न्याय की
ख़ुद ही लड़नी पड़ती,
हर झुग्गी की वुंफती भी अब
स्वयं भाग्य है लिखती ।

लड़ता है संकल्प
युग में, गाण्डीव की झूठी आशा ।

'भागो मत दुनिया को बदलो’
सूरज यही सिखाता,
हर बेटा है भगतसिंह जब
ख़ुद मशाल बन जाता ।

सदा सत्य का
पार्थ जीतता, यही युद्ध की परिभाषा ।

अख़बारों में रोज़ क्रान्ति की
ख़बर खोजने वालो,
पर पड़ोस की चीख़ें सुनकर
छिपकर सोने वालो ।

हर मानव-बम
इन्क़लाब है, हर झुग्गी की अभिलाषा,

पग-पग जहाँ
महाभारत है, लिखो पसीने की भाषा ।।