भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

जीवन में बढती खाइयों के बीच / विजय सिंह नाहटा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिन्दी शब्दों के अर्थ उपलब्ध हैं। शब्द पर डबल क्लिक करें। अन्य शब्दों पर कार्य जारी है।

जीवन में बढती खाइयों के बीच
सन्धि रेखाओं पर
धर दूंगा चराग़ उम्मीद का।
जीवन कें असंगत पैमानों
के दरमियाँ
हर थरथराती जगह
तनिक भर दूंगा
निष्कलुष प्रेम।
जहाँ जिस छोर
पसरा हुआ निर्वात
अनन्त तक
उन शून्य प्रतीतियों के
मिलन स्थल पर
सब खोखली जगहों में
पसर जाएगी
घर कर लेगी
मेरी कविता।